संवेदना


लिए  करवट जो  ख्वाबों ने
देख के मुश्किलें औरों की
तो  फिर
आज जाना ये मैंने
एक  इंसान बसता है
मेरे अन्दर भी
जो रोता है
जिसे दर्द महसूस
होता है
औरो की भी
जो करता है परवाह
अपनों के दर्द का
एहसास का
जज्बात का
आज फिर हुआ ये संज्ञान
की जिंदगी में
हर उस शख्स की
ख़ुशी मायने रखती है
जिनकी ख़ुशी से
आप खुश रहते हैं
क्यूंकि दुःख
किसी का भी क्यों न हो
[हमेशा चिंता का विषय
होता है|]
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About adhrut

पन्नो को पलटते हुए किसी कि ज़िन्दगी का अनुमान लगाना बहुत ही सरल जान पड़ता था| अब जब वक़्त ने हाथो में कलम थमा दी है तो महसूस होता है कि अतीत की सुखी डालियों को पन्नो पर उकेरना कितना मुश्किल है| ज़िन्दगी को शब्दों में ढालना असंभव सा जान पड़ता है पर कोशिश कर रहा हूँ| महज शब्द न समझे ये एहसास हैं| दुआ है आंसुओ से अनजान रहे आप| शुक्रिया| View all posts by adhrut

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